सिरमौर की राजनीति में हलचल: पंचायत और निकाय चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस-भाजपा में बढ़ी सियासी बहस

Political Debate Intensifies Between Congress

Political Debate Intensifies Between Congress

नाहन। Political Debate Intensifies Between Congress, हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद सिरमौर की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।

बहस इस बात की कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के अपने जिले में कांग्रेस संगठन अपेक्षित मजबूती क्यों नहीं दिखा पाया। जबकि भाजपा दावा कर रही है कि जिला परिषद से लेकर पंचायत और नगर निकाय स्तर तक उसे बढ़त मिली है।

चूंकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार दोनों सिरमौर से आते हैं। लिहाजा, इसलिए इन चुनावी नतीजों को अब दोनों नेताओं की संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक प्रभाव के पैमाने पर भी देखा जा रहा है। चुनाव परिणामों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार को लेकर हो रही है।

बीजेपी कर रही 13 सीटों पर दावा

कांग्रेस प्रदेश में सत्ता में है, लेकिन सिरमौर में संगठन उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पाया, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। वही जिला परिषद की 17 में से 13 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। 8 पंचायत समितियों में से 5 पर भाजपा अपना दावा कर रही हैं।

वहीं, सैकड़ों पंचायतों में भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी दिखाई दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का अपना जिला होने के बावजूद संगठन निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर पाया, तो इसके पीछे कारण क्या रहे। इसके विपरीत प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल पूरे चुनाव अभियान के दौरान लगातार सक्रिय नजर आए।

नाहन से लेकर जिले के अन्य हिस्सों तक भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में उनकी मौजूदगी बनी रही। जिला परिषद, पंचायत समिति और पंचायत स्तर तक संगठनात्मक समन्वय स्थापित करने में भाजपा अपेक्षाकृत अधिक सफल दिखाई दी। भाजपा खेमे का मानना है कि यही सक्रियता चुनावी परिणामों में भी परिलक्षित हुई है।

नतीजों ने दिए राजनीतिक संकेत

पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में विधायक रीना कश्यप के नेतृत्व में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। वहीं, शिलाई विधानसभा क्षेत्र में आए नतीजों ने भी कई राजनीतिक संकेत दिए हैं।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की उल्लेखनीय मौजूदगी ने यह संदेश दिया है कि कांग्रेस के लिए यह इलाका पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।